Friday, January 22, 2010

तुच्छ मानसिकता के ब्लॉगर हैं पीसी गोदियाल

सलीम अख्तर सिद्दीकी
मैंने अपनी पिछली पोस्ट 'भूख इंसान को गद्दार बना देती है' लिखी थी। इस पोस्ट में देश में बढ़ती महंगाई पर लिखा गया था। पोस्ट में कहीं भी हिन्दू या मुसलमान का जिक्र नहीं था। लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं, जो हर चीज में धर्म को ले आते हैं। इन लोगों का एकमात्र एजेंडा किसी न किसी रुप में मुसलमानों का विरोध करना है। ये लोग देश की प्रत्येक समस्या के लिए मुसलमानों को दोषी बताने में गुरेज नहीं करते। ऐसे ही एक ब्लॉगर पीसी गोदियाल हैं। उन्होंने अपनी टिप्पणी में लिखा हैं कि देश की यह हालत (बढ़ती महंगाई) मुसलमानों के कारण है। समझ में नहीं आता कि पीसी गोदियाल जैसे लोग चाहते क्या हैं ? शायद तुच्छ और गलीच मानसिकता के पीसी गोदियाल अच्छे खाते-पीते परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनका पेट भरा हुआ लगता है। हो सकता है कि वह भी ऐसा ही कोई काम करते हो,ं जिसकी वजह से महंगाई सुरसा के मुंह तरह बढ़ती जा रही है। ब्लॉगिंग तो वे शायद केवल मुसलामनों का विरोध करने के लिए ही करते हैं। उन्हें बताना चाहिए कि बढ़ती महंगाई में मुसलमानों का दोष किस तरह है ? गोदियाल को उन सत्तर प्रतिशत लोगों की कोई चिन्ता नहीं है, जो केवल बीस रुपए रोज की आमदनी पर गुजारा करते हैं। मैं उन्हें यह भी बताना चाहूंगा कि भारत अभी भी भूखमरी के मामले में पाकिस्तान, यमन और बंगलादेश जैसे देशों से आगे है। सच तो यह है कि महंगाई बढ़ाने में उन लोगों का हाथ है, जो सरमाएदार हैं। बड़े व्यापारी हैं। जमाखोर और मुनाफाखोर हैं। देश के इस तरह के लोगों में मुसलमानों की संख्या नगण्य है। कुछ लोग देश में चीजों का कृत्रिम अभाव करके मुनाफाखोरी और काला बाजारी करते हैं। सच तो यह है कि मुनाफाखोरों और कालाबाजारियों की वजह से नब्बे प्रतिशत हिन्दू और मुसलमान जनता त्राहि-त्राहि कर रही है। भूख को धर्म के चश्मे से देखने वाले लोग इंसानियत के दुश्मन ही कहे जा सकते हैं। यही वे लोग हैं, जो अकाल पड़ने पर गिद्ध बनकर भूख से तड़पते लोगों का गोश्त नोंच-नोंच कर खाते हैं। लेकिन इन गिद्धों का पेट कभी नहीं भरता।

30 comments:

  1. श्रीमान सिद्दकी साहब,
    आखिर आपने भी छोड़ ही दिया अपना दिखलावटी आवरण और जग जाहिर कर ही दी अपनी मानसिकता ! मुझे बुरा नहीं लगा, क्योंकि पहले से यह सब जानने के बाद ही मैं किसी के ब्लॉग पर कमेन्ट देता हूँ कि प्रतिक्रियास्वरूप वह कहाँ तक जा सकता है ! इसलिए पहले से तैयार रहता हूँ ! आपके इस लेख के प्रतिउत्तर मैं जबाब तो बहुत लंबा चौड़ा दे डालता , लेकिन हमारे यहाँ एक कहावत है "भैंस के आगे बीन बजाना" ! खैर, फिलहाल यही कहूंगा कि
    Thank you very much for your compliments !!

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  2. पीसी गौदियाल की मानसिकता तुच्छ बताकर आपने अपनी कौनसी उच्च मानसिकता का नमूना पेश किया ?

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  3. चलिए महंगाई तो अपनी जगह है.... पर आपको गोदियाल जी के बारे में ऐसा नहीं लिखना चाहिए था.... मैं आहत हूँ....

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  4. सलीम जी बात कुछ भी हो लेकिन आप ने जिन शब्दो का प्रयोग किया है उनके खिलाफ ये तो आपकी मानसिकता को दिखा रहा है और चिल्ला-चिल्ला कर रहा है कि मानसिकता तुच्छ आपकी है , ।

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  5. This comment has been removed by the author.

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  6. मुझे लगता है की असहमति जताने के लिए यदि आप संयमित रख पाते स्वयं को तो आप वही लिख पाते जो आप वास्तव में कहना चाहते थे !!

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  7. पी.सी.गोदियाल जी आप की बात से आप की भावना समझ गए है ,और भाईसाहब आप किस दुनिया से ये ज्ञान सीख कर आये है की पाकिस्तान से ज्यादा भुखमरी भारत में है ???

    अगर पाकिस्तान इतना अच्छा लगता है आप को तो अपनी तशरीफ़ वही ले जाइए, पहुच कर सब बिरादरीवाद समझ आ जाएगा आपको,सुना है मुजाहिर को रोज़ चार चार जूते पड़ते है !!

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  8. Saleem ji, Godiyal sir kabhi kabhi bhavavesh me kuchh nirmam ya kadwi tippadi kar jate hain ye sahi baat hai lekin unki tippani ek kadwi dawa ki tarah hoti hai... kabhi kabhi unke kahne ka tareeka alag hota hai warna wo bhi aaphi ki tarah ek suljhe hue aur samajhdaar sajjan purush hain... ummeed hai aap dono hi log is baat ko tool na deke baat ko aayi gayi kar denge..
    warna UMDA SOCH jaise ghatiya soch wale log yahan fir insaniyat bhool hindoo muslim ka jhagda karwa denge.
    main aapki baat se sahmat hoon agar aankdon ki nazar me dekhen to pakistan me kam gareebi hai lekin pratishat ke mamle me nahin... aisa isiliye hai ki wahan ki jansankhya bharat se kam hai... lekin aapke udaharan ko bhi durbhavna ki nazar se dekha gaya ye katai theek nahin....
    jahan tak meri samajh hai Godiyaal ji ne musalman bhaiyon ko jansakhya ki wajah se mahngaai badhne ka karak bataya... lekin sirf ye hi ek karan nahin balki ye kai karnon me se ek ho sakta hai aur fir kai aise hindoo, sikh aur isaai pariwaar bhi hain jahan log jansankhya vraddhi par ankush nahin lagate agar aisa musalmanon ke sath hai to ashiksha ke karan..
    aur ashiksha hai gareebee ke karan.
    mera vinamra nivedan hai ki baat ko rafa dafa karen aur blogwood ko sadbhavna ka manch banayen, desh ki pragati me madad karen... ek doosre ki taang kheench kar hum kisi ka bhala nahi karte na apna aur na hi desh ka..
    Kuchh jyada ya galat kaha ho to kshama karen..
    Jai Hind...

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  9. किसी का नाम लेकर छिंटा-कशी करना, किसी भी हाल में प्रबुद्ध को शोभा नहीं देता!!
    कुछ दिनों पहले किसी ने किसी दुसरे की पोस्ट हुबहू चोरी की और उस ब्लॉग का न ज़िक्र किया और न ही नाम दिया, बल्कि उस पोस्ट को किसी और ध्येय के तिहत लिया और अलग शीर्षक के साथ पोस्ट किया.मन हुआ की मैं जवाब में नयी पोस्ट लिख दूं, शीर्षक भी सोच लिया, उम्दा चोर!!!लेकिन मैं ने ऐसा सिर्फ इसलिए नहीं किया कि यह हमारे एथिक्स नहीं हैं, न ही संस्कार!!
    आपकी इन बातों से सहमत, पूरी तरह:

    लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं, जो हर चीज में धर्म को ले आते हैं। इन लोगों का एकमात्र एजेंडा किसी न किसी रुप में मुसलमानों का विरोध करना है। ये लोग देश की प्रत्येक समस्या के लिए मुसलमानों को दोषी बताने में गुरेज नहीं करते।

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  10. bhai !
    padh kar achha nahin laga ...
    dukh bhi hua

    shirshak padh kar hairaani hoti hai ki kisi ke liye seedha itna behooda aarop bhi lagaya ja sakta hai aur ...........jaane do

    bahut bura
    meri aapatti !

    jai hind !

    www.albelakhatri.com

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  11. .
    .
    .
    सलीम जी,

    बहुत इज्जत करता हूँ आपकी, पर...

    शायद तुच्छ और गलीच मानसिकता के पीसी गोदियाल अच्छे खाते-पीते परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनका पेट भरा हुआ लगता है। हो सकता है कि वह भी ऐसा ही कोई काम करते हो,ं जिसकी वजह से महंगाई सुरसा के मुंह तरह बढ़ती जा रही है।

    इस तरह लिखना और पोस्ट को ऐसा हैडर देना अच्छी बात नहीं...पी सी गोदियाल जी एक खास विचारधारा को लेकर चलते हैं... आप उनसे तर्क करिये पर विचार के स्तर पर तुच्छ और गलीच मानसिकता क्या है, किसकी है, यह फैसला अभी हुआ नहीं है और न ही जल्दी ही होने की आशा है।


    अब आप खुद यह कह रहे हो...

    "सच तो यह है कि महंगाई बढ़ाने में उन लोगों का हाथ है, जो सरमाएदार हैं। बड़े व्यापारी हैं। जमाखोर और मुनाफाखोर हैं। देश के इस तरह के लोगों में मुसलमानों की संख्या नगण्य है।"

    कोई सबूत या आंकड़ा है आपके पास इस कथन के पक्ष में... इसका मतलब यह है कि आप महंगाई का इल्जाम सीधासादा इस्लाम के अलावा अन्य धर्म के मानने वालों पर लगा रहे हैं... तो फिर गोदियाल जी के कथन और आपके कथन में क्या फर्क है ?

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  12. सिद्दकी साहब, हम भी देते है असमति की टिपण्णीयां हमे भी मिलती है बहुत सी ऎसी टिपण्णीयां जो हमे पसंद नही , लेकिन कभी भी हम ने किसी का नाम ले कर ऎसा लेख नही लिखा,आप के ऎसा लिखने से पी सी गौदियाल जी की शान मै कुछ नही घटने वाला,बल्कि लोग आप के बारे केसी सोच रखेगे??अगर प्यार से नही बोल सकते तो कम से कम जहर भी मत उगले
    धन्यवाद

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  13. किसी का नाम लेकर कोई नकारात्मक पोस्ट लिखने का पक्षधर मैं कभी भी नहीं रहा और इसलिए बार बार बार ये कहता रहा हूं कि इससे बेअतर होता कि आप उस पोस्ट का लिंक भर दे देते ।खैर, अब बात मानसिकता की तो इस बारे में सिर्फ़ ये कहना चाहूंगा कि किसी की एक टिप्पणी , या एक पोस्ट, कोई प्रतिक्रिया से झट से निर्णय कर बैठना कि वो फ़लानी मानसिकता का है ,मुझे ठीक नहीं लगता ।और देखिए औरों को भी नहीं लगा ।आप लेखन करते रहें , पाठक को अपना काम करने दें
    अजय कुमार झा

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  14. अगर आप किसी को निशाना बनाकर न लिखे तो आपका ब्लॉगर आने वाली पीढ़ी के लिए सार्थक हो सकता है। किसी को बुरा भला कहकर सामने वाले और विषेश कर खुद का समय बर्बाद मत करें.. आप तो बस सार्थक ब्लॉगिंग करें, ताकि आने वाले लोग ब्लॉग़वुड को बुरा न कहें।

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  15. सिद्दकी साहब,

    हमें बहुत बुरा लगा कि आपने नाम लेकर शीर्षक बनाया और एक ब्लॉगर की बुराई की। गोदियाल साहब बहुत अच्छॆ मानसिकता वाले हैं, यह मैं कह सकता हूँ, और आपकी इस पोस्ट से मैं बहुत आहत हूँ।

    पाठक अपने विचार कैसे भी रख सकता है, आप उसे या तो निजी पत्राचार या फ़िर उसी टिप्पणी को आगे बड़ा कर करते तो ज्यादा अच्छा लगता। इस प्रकार की पोस्ट डालने पाठक पोस्ट के मूल विषय से हट जाता है। हालांकि मैंने पोस्ट पढ़ी नहीं है। परंतु ब्लॉगर को इन बातों का ध्यान रखना चाहिये।

    अगर आप ज्यादा आहत हुए थे, तो संयम रखना था आपको अपने शब्दों पर और विषय संबंधी जबाब देना चाहिये था आपको अपनी पोस्ट पर और उस टिप्पणी का लिंक देकर अपना निष्कर्ष बता देना चाहिये था।

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  16. इस पोस्ट को हटा लें तो ठीक रहेगा

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  17. 2010 का कमाल
    लेकर आया बवाल पे बवाल
    कहीं फुल्जडियन फूट रही हैं
    तो कहीं अनारदाने

    हे प्रभु रक्षा करो

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  18. सलीम भाई, हमने तो कभी नहीं लिखा कि फ़लाँ ब्लागर नीच है, फ़लाँ ब्लागर कमीना है, अलाँ ब्लागर जेहादी है…, जबकि हम और बाकी सभी जानते हैं कि ऊपर दिये गये विशेषणों से युक्त टुटपुंजिये ब्लागर कौन-कौन हैं… :)।
    और गोदियाल जी की बात का आपने कोई तर्कपूर्ण-तथ्यपूर्ण जवाब भी नहीं दिया…

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  19. आपने अपनी राय खुद के ब्लॉग पर दी यह बेहतर किया। संकीर्ण सोच वालों को मर्चा लगेगा ही । फिरकापरस्ती तुच्छ मानसिकता का द्योतक तो है ही। [’जब शोर हो,चारों ओर सत्य के हनन के लिए,तब तुम्हें अपनी बात ज्वलंत शब्दों में कहनी चाहिए ” -भवानीप्रसाद मिश्र ]

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  20. वाह रे महा‍रथियों हकबात कहने वाले को अकेले मिलके घेर रहे हो भूल जाते हो, ब्‍लागिंग में अवधिया चाचा भी है, खा पी के नेट की गोददी में बैठे सज्जनों को हम क्‍या कहें आप स्‍वयं देख लो हमारे देश का क्‍या हाल है, एक कविता का आनन्‍द लें उसमें निम्‍न पंक्ति

    ''सुबह डालें मछलियों को दाना, शाम को खाऐं मछली-टीका अब मेरे इस देश में''

    बढा लें, हमने पहली बार स्‍वच्‍छ मानसिकता वाला बुगला देखा था, देखते ही मान भी लिया था, आप भी देखें, please वहाँ हमारा कमेंट जरूर पढियेगा तब तक आप न समझेंगे कि हमने क्‍या समझाया है

    अंधे आगे नाच के, कला अकारथ जाए !
    डायरेक्‍ट लिंक
    http://gurugodiyal.blogspot.com/2009/12/blog-post_8744.html

    अवधिया चाचा
    जो कभी अवध

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  21. सलीम साहब आप "भैंस के आगे बीन बजाना" की कोशिश न करें, यह तो सभी जानते हैं भेंसे कैसे काबू में रहती है, आप हकबात कहते रहिए, भैसों के लिए डण्‍डेवाला भेज दिया जाया करेगा

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  22. AREY BHAI SALEEM
    afsos hai mujhe apki aqal par.
    Godiyal ji sach nahin dekh sakte ye baat to apko unke chashme ka colour dekh kar hi samajh jani chahiyye thi.
    Agar aap chahte hain ke woh sachchai ke raste par chalen to unka haath pakad kar chalna hoga apko. Aap ko unhe dhikkarna nahin chahiyye. Aamir khan ne TARE ZAMEEN PAR issi liye banayi hai take log samajh len ke harek ki samajhdani ek si nahin hoti.

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  23. Saleem ji,Hamari aapatti note karen.
    Main achhi tarah janta hun ke Godiyal ji TUCHH mansikta ke ho hi nahi sakte.
    Unke samne aapki haisiyat hi kya hai?
    Unke pas kothi hai,car hai aur KUTTE bhi hain.
    itna rich admi tuchh kaise ho sakta hai?
    Haan aap unko beemar masikta ka maan sakte hain. Har taraf pollution hai. Vaicharik jagat men bhi hai. Woh aur unke kutte polution ki wajah se rogi ho gaye hain woh bhi kewal mansik roop se warna shareer se bilkul fit hain. roop aakar dekho to DAWOOD IBRAHIM ko fail kar rahe hain.
    waise main to sari tension ke peechhey KAAM (sex) ko karan manta hun . Jab admi patni ko santusht nahin kar pata to khud bhi asantusht hi rehta hai aur apni bhadas nikalne ke liye asan target dhundta hai aur iss samay musalman se asaan target na to koi India men hai aur na hi world men.
    So bhayya hum to apko yahi samjha sakte hain ki BHARTIYA SANSKAR to andhe ko bhi andha kehne ki ijazat nahin dete phir apne itna ghatiya arop unpar direct kaise laga diya aur woh bhi bilkul ghalat?
    Ek baar phir aapatti darj karen.

    ReplyDelete
  24. Saleem ji,Hamari aapatti note karen.
    Main achhi tarah janta hun ke Godiyal ji TUCHH mansikta ke ho hi nahi sakte.
    Unke samne aapki haisiyat hi kya hai?
    Unke pas kothi hai,car hai aur KUTTE bhi hain.
    itna rich admi tuchh kaise ho sakta hai?
    Haan aap unko beemar masikta ka maan sakte hain. Har taraf pollution hai. Vaicharik jagat men bhi hai. Woh aur unke kutte polution ki wajah se rogi ho gaye hain woh bhi kewal mansik roop se warna shareer se bilkul fit hain. roop aakar dekho to DAWOOD IBRAHIM ko fail kar rahe hain.
    waise main to sari tension ke peechhey KAAM (sex) ko karan manta hun . Jab admi patni ko santusht nahin kar pata to khud bhi asantusht hi rehta hai aur apni bhadas nikalne ke liye asan target dhundta hai aur iss samay musalman se asaan target na to koi India men hai aur na hi world men.
    So bhayya hum to apko yahi samjha sakte hain ki BHARTIYA SANSKAR to andhe ko bhi andha kehne ki ijazat nahin dete phir apne itna ghatiya arop unpar direct kaise laga diya aur woh bhi bilkul ghalat?
    Ek baar phir aapatti darj karen.

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  25. "waise main to sari tension ke peechhey KAAM (sex) ko karan manta hun . Jab admi patni ko santusht nahin kar pata to khud bhi asantusht hi rehta hai aur apni bhadas nikalne ke liye asan target dhundta hai aur iss samay musalman se asaan target na to koi India men hai aur na hi world men."

    यह है मुसलमानों की उच्च मानसिकता का नमूना !!

    @KAMDARSHEE:जबाब तो तुम्हे में अपने सोलिड ढंग से देता मगर दो दिक्कते है , एक यह की यह प्रोटोकोल के खिलाफ होगा और दूसरा यह की मैं तुम जैसे "नीच" लोगो के लेबल तक नहीं गिर सकता !

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  26. सलीम भाई हम ब्लॉगिंग अपनी बात रखने के लिये करते हैं न तो फिर यह एक दूसरे के खिलाफ दुर्वचन क्यूं । खुदा (अल्लाह) आपको अमन की राह चलाये । महंगाई की बात तो आपने ठीक की कि आसमान छू रही है पर इसमें किसी धर्म विशेष का हाथ नही है । लालची लोग हर धरम में हैं ।

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  27. Congress hai asalii samasya

    congress ko vote kisne diya???

    Is prashna ka uttar hii
    asalii samasya hai

    PAHCHAANIYE AUR SAMAJHIYE

    SHIV RATAN GUPTA
    9414783323

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  28. Congress hai asalii samasya

    congress ko vote kisne diya???

    Is prashna ka uttar hii
    asalii samasya hai

    PAHCHAANIYE AUR SAMAJHIYE

    SHIV RATAN GUPTA
    9414783323

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  29. Congress hai asalii samasya

    congress ko vote kisne diya???

    Is prashna ka uttar hii
    asalii samasya hai

    PAHCHAANIYE AUR SAMAJHIYE

    SHIV RATAN GUPTA
    9414783323

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