सलीम अख्तर सिद्दीक़ी
मैंने वरुण के आगे गांधी लगाना बंद कर दिया है, क्योंकि वरुण के आगे गांधी लगाना महात्मा गांधी का अपमान है। महात्मा गांधी वो शख्स थे, जो अहिंसा के कायल थे। वरुण हिंसा की बातें करके समाज का बांटने का काम कर रहा है। उसके स्वर्गीय पिता ने भी इमरजैंसी के दौरान हिंसा के बल पर देश की जनता को हांकने की कोशिश की थी। लेकिन देश की जनता ने उन्हें किनारे लगा दिया था। संघ परिवार को वरुण में संजय की झलक दिखायी दे रही है। संघ परिवार को हमेशा से ही खून और आग में वोट चमकते हैं। वरुण हाथ काटने और जला देने की बात कर रहा है, इसलिए वरुण संघ परिवार का नया मोहरा बन गया है। आपत्तिजनक अवस्था में देखा। जैसे इतना की काफी नहीं था। आतंकवादियों को सम्मान के साथ संघ परिवार को ऐसे ही मोहरों की तलाश रहती है। पुराने मोहरे बूढ़े हो गये हैं। उनकी धार को देश की जनता और वक्त ने कुंद कर दिया है। जिने मोहरों के सहारे सत्ता हासिल की थी, उन्हें कूड़ेदान में डाल दिया है। सत्ता मिली तो भ्रष्टाचार के मामले में कांग्रेस को अच्छा कहलवा दिया। देश की जनता ने सिर्फ इन्हीं लोगों को नोट और औरत के पीछे भागते देखा। लोगों ने नोटों के बंडलों को चुपके से दराज में रखते और पैसे को दूसरा खुदा बताते हुए माथे से लगाते देखा। नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले संघ के एक पदाधिकारी को एक महिला के साथ कंधार तक हिफाजत के साथ छोड़ते देखा। गुजरात को एक सम्प्रदाय के खून से रंगते देखा। ईसाईयों के लिए उड़ीसा की जमीन तंग करते देखा। ईसाईयों को जंगलों में रहने के लिए मजबूर करते देखा। जिन लोगों ने यह सब किया उन्हें सजा देने के बजाय सत्ता की कुर्सी सौंपते देखा।
इस चुनाव में भाजपा के पास जनता के सामने वोट मांगने के लिए जाना था। कोई मुद्दा नहीं था। वरुण को उकसाया गया। उसके मुंह से वह सब कहलवाया गया, जिससे समाज में नफरत फैले, दंगे हों, कर्फ्यू लगे और वोटों की फसल लहलाने लगे। पीलीभीत में गेंहूं की फसल कट रही है। लेकिन भाजपा वहां वोटों की फसल बोना चाहती है। वरुण झांसे में आ गया। अब जेल की हवा खा रहा है। संटा परिवार को अभी पता ही नहीं चला है कि जिस राजनीति को वह बार-बार आजमाना चाहता है, उस राजनीति के दिन कब के लद चुके हैं। देश का हर आदमी चाहे वह किसी भी सम्प्रदाय से ताल्लुक रखता है। सबसे पहले दो जून की रोटी चाहता है। भूखे पेट तो भजन भी नहीं होता। सच तो यह है कि संध परिवार और तालिबान का मकसद एक ही है। तालिबान इस्लाम के नाम पर तो संघ परिवार का हिन्दुत्व के नाम पर बेगुनाह लोगों को मारने की बात करता है। न तो तालिबान का इस्लाम को कुछ लेना-देना है और न ही संघ परिवार का हिन्दुत्व से कोई वास्ता है। वरुण को जेल में करने के लिए कुछ नहीं होगा। उसे जेल में चिंतन करना चाहिए कि उनकी मां, जो जानवरों के खरोंच आने पर भी भावुक हो उठतीं हैं, इंसानों की जान लेने की बात करके वह अपनी मां के आन्दोलन को खत्म करना चाहता है या संघ परिवार का मोहरा बनकर एक दायरे में सिमटना चाहता है।