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Saturday, October 10, 2009

इस्लाम किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की इजाजत नहीं देता

सलीम अख्तर सिद्दीक़ी
आजकल बहुत से ब्लॉग धर्म पर बहस कर रहे हैं। संघी की विचारधारा का एक ऐसा गिरोह है, जो धर्म पर बेमतलब की बहस को बढ़ावा देता है। स्चच्छ संदेश : हिन्दुस्तान की आवाज के नाम से ब्लॉग चलाने वाले सलीम खान अपने ब्लॉग पर इस्लाम की पैरवी करते नजर आते हैं तो संघी विचारधारा के लोग उनके पीछे पड़ जाते हैं। किन्हीं रचना ने अपने ब्लॉग पर लिखा कि वह इस्लाम धर्म अपनाने को तैयार हैं। लेकिन उन्होंने कुछ शर्तों क साथ इस्लाम धर्म कबूलने की बात कही है। मैं रचना जी से बहुत ही एहतराम और अदब से कहना चाहता हूं कि धर्म और प्यार समर्पण मांगता है, इनमें शर्तें नहीं लगायी जाती हैं। दरअसल, बहुत सारे लोग कुछ गुमराह मुसलमानों के आचरण को देखकर यह मान लेते हैं कि यही इस्लाम है। जबकि ऐसा नहीं हैं। इस्लाम में शराब पीने और ब्याज लेने का हराम करार दिया गया है। अब यदि कोई मुसलमान ये दोनों काम करता है तो यह इस्लाम की गलती नहीं है। ये उसके अपने आचरण हैं। जैसे कोई सनातन धर्म को मानने वाला गाय का गोश्त खाता है तो यह सनातन धर्म की गलती नहीं है। यदि जैन धर्म से ताल्लुक रखने वाला आदमी जीव हत्या करता है तो वह जैन धर्म के विपरीत काम करता है। इससे जैन धर्म की शिक्षाएं गलत नहीं हो जाती हैं। इस्लाम कहता है कि 'जिसने भी किसी एक बेगुनाह का कत्ल किया, उसने पूरी इंसानियत का कत्ल किया।' अब अगर कोई मुसलमान बम बांधकर बेगुनाह लोगों के बीच जाकर फट जाए तो इसमें इस्लाम की गलती कैसे है। ऐसा भी नहीं है कि मुसलमानों ने ऐसी कायरतापूर्ण कार्यवाईयों का समर्थन किया हो। आतंकवाद के खिलाफ उलेमा फतवा जारी कर चुके हैं।
धर्म कोई बुरा नहीं हैं। इसको मानने वाले बुरे हैं। दिक्कत तब शुरु होती है, जब हर कोई अपने धर्म को सर्वश्रेष्ठ बताकर दूसरे धर्म में खामियां निकालता है। कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो खुर्दबीन लेकर धार्मिक पुस्तकों का पोस्टमार्टम करते हैं। एक धारणा बना ली गयी है कि इस्लाम में औरतों की बहुत दुर्गति है। चार शादियां करते हैं। यहां मैं बता दूं कि इस्लाम में चार शादियां का प्रावधान ऐयाशी के लिए किन्हीं हालातों के तहत रखा गया है। अब अगर कोई इस्लाम में दी गयी सुविधा का गलत इस्तेमाल किया जाए तो इसमें इस्लाम क्या करे ? क्या देश के संविधान में भी दी गयी कुछ रियायतों को गलत इस्तेमाल नहीं होता ? इस्लाम ने ही औरत को सबसे पहले आजादी दी। इस्लाम ने ही सबसे पहले इंसानों को गुलाम बनाकर रखने की परम्परा को खत्म करने की शुरुआत की। इस्लाम औरत को नंगेपन से बचने की सलाह देता है। क्या सनातन धर्म नंगेपन की इजाजत देता है ? रचना जी कहती हैं कि इस्लाम अपनाने के बाद वह जींस भी पहनेंगी और और स्कर्ट भी। उनसे सवाल है कि क्या मुस्लिम युवतियां जींस नहीं पहनती हैं ? क्या वे नौकरी नहीं करतीं ? इस्लाम किसी पर जोर जबरदस्ती नहीं करता है। अब यह मत कहना कि तालिबान क्या कर रहे हैं ? यह बात मैं पहले ही कह चुका हूं कि एक मुसलमान का गैर इस्लामी आचरण इस्लाम नहीं है। संघी गिरोह से एक सवाल यह भी है कि क्या सनातन धर्म जींस और स्कर्ट पहनने की इजाजत देता है ? यदि हां तो फिर हमारे संघी भाई क्यों स्कूल कॉलेजों में ड्रेस कोड लागू कराने के लिए धरन-प्रदर्शन करते है ? क्यों वे पबों में जाकर जींसधारी युवतियों को मारते-पीटते हैं ? क्या फर्क है उनमें और तालिबान में ?
दरअसल, इस्लाम के उदय से ही इस्लाम को खत्म करने की साजिशें की जा रही है। क्योंकि इस्लाम धर्म ने ही शोषण और असमानता को खत्म करने का बीड़ा सबसे पहले उठाया था। यही वजह रही कि डेढ़ सदी की अन्दर ही इस्लाम धर्म दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा धर्म है। एक ताजा सर्वे के अनुसार दुनिया का हर चौथा आदमी इस्लाम को मानने वाला है। आखिर इस्लाम में ऐसा कुछ तो है, जिससे आकृषित होकर दुनिया के बहुत सारे लोग आज भी इस्लाम को अपनाते हैं। मुझे यह कहने में कोई हिचक नहीं है कि इस्लाम में कुछ ऐसे लोगों ने भी घुसपैठ की है, जो मुसलमानों को सही इस्लाम के बजाय ऐसी बातें सिखा रहे हैं, जिनका इस्लाम सख्ती से विरोध करता है। आज का तथाकथित जेहाद ऐसा ही गैर इस्लामी कृत्य है। जेहाद उस वक्त किया जाता है, जब मुसलमानों को अपने धर्म के अनुसार जीने का हक छीना जाए। मुझे नहीं लगता कि आज दुनिया में कहीं भी मुसलमानों को अपने धार्मिक फर्ज अदा करने से रोका जाता हो। हां, फ्रांस जैसे कुछ देश जरुर हिजाब आदि पर पाबंदी लगाकर मुसलामनों को उकसाते रहते हैं। लेकिन वह इतनी बड़ी बात नहीं है कि जेहाद किया जाए। एक बात और मैं और कहना चाहता हूं कि इस्लामी देशों में रहने वाले गैर मुस्लिम अल्पसंख्यकों को भी धार्मिक आजादी मिलनी चाहिए। इस्लाम किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की इजाजत भी नहीं देता है। साफ कहा गया है कि 'दूसरे धर्म को बुरा मत कहो।'

आस्ट्रेलिया में भारतीय, भारत में बिहारी
इस्लाम विरोध ही भाजपा का हिन्दुत्व
दूसरे धर्म की 'बहु' मंजूर, 'दामाद' नहीं
आखिर हिंसा से नहीं बच सका मेरठ
इसलाम के असली दुश्मन तालिबान