Wednesday, September 23, 2009

इंसानों में ही रहती है शैतानो की भी टोली..

अतीक अहमद उस्मानी

ईद के दिन इत्तेफाक़न B4M के जरिये उदय शंकर खरवारे के संघी, सांप्रदायिक, मुस्लिम विरोधी विचार पढने को मिले ! ईद के स्नेहिल, प्यारो मोहब्बत, भाईचारा, इंसानियत भरे पलों में कुछ ही देर के लिए ही सही, खटास महसूस हुआ और दिल से एक आह निकली " या खुदा! ये सांप्रदायिक तत्व क्या क़यामत तक इसी तरह इंसानियत, प्यार-मोहब्बत, खुलूस, साम्प्रदयिक सोहार्द के दामन को अपनी नापाक इरादों से तार तार करने का दुस्साहस करते रहेंगे " लेकिन अगले ही पल अपने इस सहमे ख्याल के लिए तौबा भी की क्योंकि खुदा ने तो क़यामत तक शेतानो को इंसानियत के खिलाफ मुहीम चलाने की छूट का वादा कर लिया है! सवाल उठता है कि ये शैतान कहां है ? इसका जवाब मै ही इस शेर के जरिये देना चाहूँगा -" इंसानों में ही रहती है शैतानो की भी टोली काटने पर ही पता चले है सांप है कैसे ज़हरीले "रहा भाई उदय जी आपके " सही बात कही तो संघी कह गए " लेख के लिए जवाब तो फिर अपने ही कहे गए इस मुक्तक के जरिये आपको सचेत करना चाहूँगा-अपनी नस्लों में नफरतों का ज़हर ये त-आ-स्सुब परस्त भरते हैकितने नादान है कि खुद सामाँअपनी तखरीब का भी करते है(तखरीब- विनाश)उदय जी आप संघी है या नहीं एक सामान्य बुद्धि का आदमी भी आसानी से बता सकता है हरिवंश जी, ओमप्रकाश अश्क जी, महेश खरे, ............ इन सभी के साथ काम करना आपके निश्चल साम्प्रदायिकताहीन हदय का प्रमाण नहीं , आप उस वक़्त क्या थे आज क्या हो ये आपके विचारो से साफ़ झलकता है ! किसको पता चलता है की उजले तन में काला मन भी छुपा है ! आप द्वारा मुस्लिमो की आंतकवादी, बलात्कारी, हिन्दू लड़की को भगाकर विवाह करने की प्रतिशतता की जानकारी देने पर मुसलमानों को तो क्या किसी भी खुले मस्तिष्क वाले समुदाय को भी ना तो यकीन है और ना आश्चर्य ! क्योंकि सम्पुर्ण मुस्लिम समुदाय के प्रति जहर उगलने वाले आपके विचार खुद स्पष्ट करते है की आप किस प्रकार के पत्रकार हो और इस प्रकार के विचार व्यक्त करने में आपकी क्या मज़बूरी है !यकीन रखिये, कोई भी आपके व्यवसाय में बाधक नहीं होगा आप अपने सवालो का जवाब देने का क्योँ चैलेन्ज दे रहे हो क्योंकि आपने तो सिर्फ कुछ करोड़ मुसलमानों की जनसंख्या की प्रतिशतता अपने आशियाने में ही निकाल ली और अधिकतर मुसलमानों पर दोषारोपण करते हुए ये भी एलान कर दिया की भारत जितने मुस्लिम है वो सब हिन्दू थे आपको तो नोबल पुरस्कार मिलना चाहिए क्योंकि आपने मेंडल के आनुवंशिकता के नियमो की बिना किसी सबूत व प्रयोग की पुष्टि करने की कुचेष्टा की है या फिर कहिये की आप वेघ्यानिक लेमार्क के अनुयायी है जिसने कहा है की अर्जित गुण पैतृक होते है और आप ही ये बता सकते है कि मुसलमानों में मानवता विरोधी गुण कहा से आये? आप तो वरिष्ठ पत्रकार है जानते होंगे कि राज्य स्थायी होता है कभी मरता नही (क्या मोदी को ये विशेषता हासिल है) , राज्य का स्वरूप , सरकार पर निर्भर है- वो प्रजातांत्रिक है या तानाशाही । जनाब ये कहिऐ-मोदी राज्य नही राज्य का स्वरूप है । रही मोदी को शर्म आने की बात, तो गुजरात का तांडव , पूरे देश को ही नही पूरे विश्व को शर्मसार कर गया ।(यंहा गोधरा को मे नही भूलूंगा वो भी एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी ) और उस समय के माननीय पीएम अटल जी को भी । और आज आप जौसे लोगो की आत्मग्लानि, चिंता,सीमित सोच,डर और साम्प्रदायिकता भरी रक्षा इस बात का सबूत है के उस समय गुजरात मे वर्ग विशेष का आतंकवाद,बलात्कार, खून खराबा, धार्मिक उन्माद के लिए आपके नायक मोदी (असल मे खलनायक) और उनके समर्थक ही जिम्मेदार थे । आप कितने बरसो तक अपने घर वालों को दूसरे घर मे जाने की सलाह देते रहेंगे ।वैस सलीम सिद्दीकी आपके कुप्रचार का जवाब दे चुके हैं (पढने के लिए सलीम सिद्दीकी को ब्लाग हक बात खोले ) उम्मीद है खरवारे साहिब, झूठे आंकड़ों काजाल ना फैलाऐंगे आप ने जो सवाल लिखे है उनके जवाब सिर्फ आपके लिए (बाकि हिन्दु भाई इसे अन्यथा ना ले)आपने आतंकवादियो की तादाद मे 90 फीसदी से ज्यादा मुसलमानों को शामिल कहा लेकिन भाई आन्ध्र प्रदेश, छत्तीसगढ, नागालैण्ड और उड़ीसा राज्य भी भारत के हिस्से है जंहा क्या होता है , सब जानते है (शायद वो लोग आपकी नजर मे आतंकवादी नही क्रांतिकारी है ) ये भी सबको पता है कि इन राज्यो मे मुसलमान कितनी संख्या मे है............आपने कहा देश मे 85 फीसदी बलात्कारी मुस्लिम है साथ ही आप ये कहते हैं सारे मुसलमान कनवर्टेड हैं । यानि इसके लिए हिन्दु जिम्मेदार है क्योकि मुसलमानों को जो मिला है वो हिन्दुओ से ही तो मिला है.............आप ये भी कहते है हिन्दु लड़कियो को भगाकर विवाह करने वालों में 94 फीसदी मुस्लिम है । इस बात का जवाब है कि लड़की अगर घर से भागती है तो यही कहा जाऐगा कि उसके घर वाले उसे सही संस्कार ना दे सके । या यूं भी कह सकते हैं कि इंसान की फितरत होती है कि वो हमेशा बेहतरीन चीजों के पीछे भागे, यंहा भी शायद घर से भागने वाली लड़कियों को पता चल जाता है कि इस्लाम धर्म उनके वर्तमान धर्म से बेहतर है तभी तो वो सब कुछ छोड़कर घर से चली जाती है और आप उसके लिए मुसलमानों को जिम्मेदार ठहराते हो......................

(राजस्थान)01580-222345

8 comments:

  1. Balatkar ke liye tumahre hindu patrak gun nahi balki tumhari gandi kitab "KURAN" ki shiksha uttardai hai aur jis umar ki ladkiya bhagti hai vo uchit aur anuchit ka fark samjhane ki umr nahi hoti hai.

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  2. बिना कुछ जाने कुरान के बारे मे लिखकर , अपने अपने आप का बलात्कार कर दिया । जिस मे अफना नाम लिखने की हिम्मत नही वो कुरान को कैसे परिभाषित कर सकता है । कुरान , मे पूरी दुनिया है और शायद आपके लिए अदरक का स्वाद । भाई एक बार कुरान पढो ...दिमाग सही हो जाऐगा । ...........

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  3. लेख बहुत शान्‍दार है, बधाई में इस ब्लाग को जरूर फोलो करूंगा परन्‍तु कमेंटस में आप और अजनबी दोंनो गलत हैं, अजनबी इस्‍लामी ग्रंथ quran को x kuran x लिखता है आप क़ुरआन को xकुरानx लिखते हो, दोंनों कुरआन का मुखडा देख आओ
    www.quranhindi.com पर

    signature:
    विचार करें कि मुहम्मद सल्ल. कल्कि व अंतिम अवतार और बैद्ध मैत्रे, अंतिम ऋषि (इसाई) यहूदीयों के भी आखरी संदेष्‍टा? हैं या यह big Game against Islam है?
    antimawtar.blogspot.com (Rank-1 Blog)

    छ अल्लाह के चैलेंज सहित अनेक इस्‍लामिक पुस्‍तकें
    islaminhindi.blogspot.com (Rank-2 Blog)
    डायरेक्‍ट लिंक

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  4. उमर भाई आपका कहना सही है । जल्दी मे क़ाफ को काफ लिख गया । रही बात कुरआन की तो वो तो दिल मे बसता है । आपको पैनी निगाह के लिए बधाई .....अल्लाह कामयाब करे

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  5. आपके जवाब से अर्थात अपनी गलती मानने से मुझे बहुत खुशी हुई, अल्‍लाह और कुरआन के मामले में कोई ना माने मैं तब भी पीछा नहीं छोड देता, शैतानों को टोली पर हम घूम लिये मुसमानों की टोली पर आपको घूम आना चाहिये, हाजिरा का सबूत आप जानते हैं ही होगे कमेंटस होता है,
    http://hamarianjuman.blogspot.com/2009/09/blog-post_24.html
    डायरेक्‍ट लिंक

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  6. bhai KURAN ek sarfire lutre ke dimag ki upaj hai na

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  7. huch log itne bujdil hote hain ke, apni pahchan chupakar vaar karte hain. inke kahe ka bura bhee nahin mana jata. ishwar inko sadbuddhi de.

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  8. http://www.islamicwebdunia.com/galtfhm.pdf

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