Sunday, December 21, 2008

बाबरी मस्जिद, गुजरात, आतंकवाद और पाक

मुंबई के आतंकी हमलावरों ने जब ताज होटल में कुछ लोगों को बंधक बनाया तो बंधकों में से एक ने हिम्मत करके पूछा ÷तुम लोग ऐसा क्यों कर रहे हो ?' इस पर एक आतंकी ने कहा, ÷क्या तुमने बाबरी मस्जिद का नाम नहीं सुना ? क्या तुमने गोधरा के बारे में नहीं सुना ?' आतंकी बाबरी मस्जिद और गुजरात का हवाला देकर अपनी नापाक हरकत को पाक ठहराने का कुतर्क दे रहे थे। सिर्फ मुंबई ही नहीं देश के अन्य हिस्सों में हुई आतंकी वारदात को अंजाम देने वाले संगठन बाबरी मस्जिद और गुजरात को ढाल बनाते रहे हैं। इन आतंकियों से पूछा जाना चाहिए, जिन बेकसूर लोगों को तुम निशाना बनाते हो क्या वे लोग बाबरी मस्जिद विध्वंस और गुजरात दंगों के लिए जिम्मेदार थे ? आतंकी हमलों में मारे गए उन बच्चों का क्या कसूर था, जिन्होंने बाबरी मस्जिद विध्वंस और गुजरात दंगों के बाद ही दुनिया देखी थी ? भारतीय मुसलमानों की हमदर्दी का नाटक करने वाले आतंकी संगठन क्या इस तरह से फायरिंग करते हैं या बमों को प्लांट करते हैं कि मुसलमान बच जायें और दूसरे समुदाय के लोग मारे जायें। आतंकियों को मालूम हो चुका होगा मुंबई हमलों में ही 40 मुसलमानों ने अपनी जान गंवाई है और 70 के लगभग घायल हुऐ हैं। पहले भी मुसलमान आतंकी हमलों के शिकार होते रहे हैं। मुसलमानों को निशाना बनाकर वे बाबरी मस्जिद और गुजरात का कैसा बदला है, यह समझ से बाहर है।
दरअसल, बाबरी मस्जिद और गुजरात का नाम लेकर आतंकी भारतीय मुसलमानों की हमदर्दी हासिल करने के साथ ही मुसलमानों और हिन्दुओं के बीच की दूरी बढ़ाना चाहते हैं। लेकिन दोनों ही समुदायों ने उनकी चाल को कभी कामयाब नहीं होने दिया। मुंबई हमलों के बाद तो हिन्दुओं और मुसलमानों की बीच की दूरियां कम ही हुई हैं। इससे बड़ी क्या बात हो सकती है, भारतीय मुसलमान मारे गए आतंकियों को भारत की सरजमीं पर दफन होते भी नहीं देखना चाहते। आतंकियों और पाकिस्तान के खिलाफ मुसलमानों का गुस्सा इस बात का संकेत है कि मुसलमान भी अब बाबरी मस्जिद और गुजरात को आतंकियों की ढाल बनता नहीं देखना चाहते हैं।
बाबरी मस्जिद विध्वंस और गुजरात दंगे हमारे देश का अपना मसला है। भारतीय मुसलमानों ने बाबरी मस्जिद विध्वंस और गुजरात दंगों का बदला लेने के लिए पाकिस्तानियों को अधिकृत नहीं किया है। मुसलमानों को अपने देश के संविधान और न्यायपालिका पर भरोसा है। मुसलमान अपने उपर होने वाले जुल्म की लड़ाई को इस देश के हिन्दुओं के सहयोग से लड़ता रहेगा। मुसलमानों ने कभी पाकिस्तान से मदद नहीं मांगी और न ही मांगना चाहते हैं। गुजरात और बाबरी मस्जिद की आड़ में आतंक बरपाने वाले लोगों के देश में गुजरात और बाबरी मस्जिद जैसे हादसों की गिनती करना मुश्किल है। पाकिस्तान में नमाजियों से भरी मस्जिद को बमों से उड़ाकर कौनसी मस्जिद के विध्वंस का बदला लिया जाता है ? आत्मघाती हमलों में बेकसूर लोगों की जान लेकर किस गुजरात का बदला लिया जाता है ? भारतीय मुसलमानों पर होने वाले अत्याचार का बहाना बनाकर आतंकी वारदात करने वालों को पहले अपने देश के उन मुसलमानों पर गौर करना चाहिए, जिन्हें आज तक भी पाकिस्तानी होने का सर्टीफिकेट नहीं मिल सका है। बंटवारे के समय पाकिस्तान गए भारतीय मुसलमानों पर महाजिर (शरणार्थी) होने का लेबल हटा नहीं है। पाकिस्तान मे आरक्षण को इस तरह से लागू किया गया है कि महाजिर युवाओं को नौकरी नसीब नहीं होती । छंटनी के नाम पर महाजिरों को नौकरियों से बेदखल करके उनके स्थान पर सिंधियों और पंजाबियों को रखा जाता है। महाजिरों को रॉ का एजेन्ट बताकर उन पर अत्याचार का सिलसिला चलता रहता है। हजारों महाजिर युवाओं को बेदर्दी से मार दिया जाता है। मरने वालों को न तो किसी प्रकार का मुआवजा मिलता है और ही कहीं कोई सुनवाई होती है। महाजिरों के नेता अल्ताफ हुसैन को लन्दन में निर्वासित जीवन जीना पड़ रहा है। उनका कसूर यह है कि वे महाजिरों पर होने वाली ज्यादतियों को विरोध करते हैं। हद यह है कि मरहूम बेनजीर भूट्टो एक बार महाजिरों को हिन्दुओं और सिखों की नाजायज औलाद कह चुकी हैं।
एक हादसे की बदौलत ÷मिस्टर 10 परसेन्ट' से मिस्टर 100 परसेन्ट बने आसिफ अली जरदारी की बेशर्मी देखिए कि वह सबूत होने के बाद भी यह मानने को तैयार नहीं हैं कि आतंकवादी पाकिस्तान से ही ट्रेनिंग लेकर आए थे। उनके झूठ का पर्दाफाश करने वाले निजी न्यूज चैनल पर देशद्रोह का मुकदमा कायम करके आसिफ जरदारी लोकतन्त्र में तानाशाह जैसा बर्ताव कर रहे हैं।
170, मलियाना, मेरठ
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1 comment:

  1. बहुत अच्छा लिखा आपने .आप के विचार अगर नासमझो को भी समझ आ जाए तो हम से ज्यादा कौन सुखी होगा .

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