Friday, April 2, 2010

कमाल है ! मोदी को भी भगवान याद आ गए

सलीम अख्तर सिद्दीकी
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी आजकल सुर्खियों में हैं। नरेन्द्र मोदी जब से गुजरात दंगों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित विशेष जांच दल के सामने पेश हुए हैं, तब से वे कुछ अजीब सी बातें करने लगे हैं। मसलन, उन्होंने कहा कि वे एसआईटी के बुलाने पर उसके सामने इसलिए पेश हुए हैं, क्योंकि वे कानून का आदर करते हैं। यह भी कहा कि पिछले आठ सालों से मीडिया के कठघरे में खड़ा हूं। उनका यह भी कहना है कि एसआईटी की पूछताछ उनके लिए कठिन क्षण था। उन्होंने भगवान से आत्मबल देने की प्रार्थना भी की है। उन्होंने यह भी कहा है कि उन्होंने गोधरा दंगों का विरोध किया था।
पता नहीं नरेन्द्र मोदी कानून का सम्मान कब से करने लगे हैं। 2002 में जब गुजरात जल रहा था, पूरे गुजरात में कानून नाम की चीज खत्म हो गयी थी। सिर्फ नरेन्द्र मोदी का ही कानून चलता था। यदि मोदी कानून का इतना ही सम्मान करने वाले होते तो गुजरात पूरी दुनिया में बदनाम नहीं होता। अरबों रुपयों की सम्पत्ति बच जाती और हजारों लोगों को अपनी जान से हाथ धोना नहीं पड़ता। पिछले आठ सालों से मीडिया उन्हें कठघरे में भी खड़ा नहीं करता। वैसे उन्हें पता होना चाहिए कि उन्हें केवल मीडिया ने ही कठघरे में खड़ा नहीं कर रखा है, उन्हें हर वो आदमी कठघरे में खड़ा करता है, जो मानवतावादी है, धर्मनिरपेक्ष है और सही मायनों में राष्ट्रवादी है। लेकिन उन्होंने उस वक्त किसी की नहीं सुनी क्योंकि उस वक्त तो उनके शरीर में जनरल डायर, हिटलर और ईदी अमीन की आत्मा प्रवेश कर गयी थी। उनका आचरण एक तानाशाह सरीखा हो गया था। उस वक्त गुजरात में वही हुआ था, जो मोदी चाहते थे। गुजरात में भारतीय कानून गौण और 'मोदीत्व' कानून ही चलता था। अल्पसंख्यकों के लिए तो आज भी मोदी का ही कानून चलता है। उनका सीना भी 46 इंच का हो गया था। जरा याद किजिए, जब वह गर्व से कहते थे कि गुजरात बनाने कि लिए 46 इंच का चौड़ा सीना चाहिए।
कितनी अजीब बात है कि 46 इंच का सीना रखने वाले नरेन्द्र मोदी को एसआईटी के सामने पेश होने में पसीना आ गया। पूछताछ के वक्त उनका सीना 46 से 36 इंच हुआ या नहीं यह तो नहीं पता, लेकिन इतना तो हुआ कि उन्हें कठिन क्षण में भगवान याद आ गए और भगवान से और अधिक आत्मबल देने की प्रार्थना करने लगे। काश! वे घरों को आग लगाने वाले, जीवित लोगों को आग में झोंकने वाले दंगाईयों को काबू करने के लिए भगवान से आत्मबल देने की प्रार्थना कर लेते तो शायद आज उन्हें एसआईटी के सामने पेश नहीं होना पड़ता और लोगों की नफरतों को नहीं झेलते। मात्र एसआईटी के सामने पेश होने से ही कठिन क्षण की बात करने वाले नरेन्द्र मोदी को पता होना चाहिए कि गुजरात के अल्पसंख्यकों ने कैसे अपने वे बुरे दिन गुजारे होंगे। मोदी ने तो मात्र नौ घंटे ही एसआईटी के सामने गुजारे हैं। मोदी के सताए हुए लोग तो अब तक कठिन क्षण नहीं दिन, महीने और साल गुजार रहे हैं।
अब कुछ लोग यही प्रलाप करेंगे कि गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में रामसेवकों को जिन्दा नहीं जलाया जाता तो गुजरात में वह सब कुछ नहीं होता जो हुआ था। सवाल यह है कि क्या इतनी बड़ी घटना के कुछ धंटों बाद ही इस नतीजे पर पहुंचा जा सकता है कि गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के एस 6 कोच में किन लोगों ने आग लगायी है ? हालांकि बाद में कई जांच आयोगों ने अपनी रिपोर्ट में यह खुलासा किया है कि एस 6 कोच में आग अन्दर से लगी थी, बाहर से आग लगाना सम्भव नहीं था। चलिए माने लेते हैं कि एस 6 कोच में आग मुसलमानों ने ही लगायी थी। ऐसा होने पर भी क्या जिम्मेदार लोगों को पकड़ने के बजाय ेबेकसूर लोगों को जिन्दा आग में झोंक देना सही था ? क्या बाबरी मस्जिद विध्वंस बाद हुए मुंबई के मुस्लिम विरोधी दंगों की प्रतिक्रिया में मार्च 1993 के मुंबई बम धमाकों को भी सही ठहराया जा सकता है ? क्या इंदिरा गांधी की हत्या के बाद सिखों का कत्लेआम सही था ? मोदी ने 'क्रिया की प्रतिक्रिया' का जो सिद्वान्त घड़ा था, उस सिद्वान्त के आधार पर तो यही कहा जा सकता है कि मुंबई के बम धमाके और सिखों का कत्लेआम सही था। मोदी के चेले आज भी इसी सिद्वान्त को बार-बार दोहराकर कुतर्क देने से बाज नहीं आते हैं। सच तो यह है कि किसी सम्प्रदाय के कुछ लोगों की गलत हरकतों की वजह से पूरे समुदाय को कठघरे में खड़ा करना हद दर्जे की बेवकूफी है। 'क्रिया की प्रतिक्रिया' का सिद्वान्त लागू किया जाएगा तो फिर कानून नाम की चीज कहां रह जाएगी ? मत भूलिए हम एक लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष देश के सुसंस्कृत और सभ्य नागरिक हैं। जो कुछ 1984 में सिखों के साथ हुआ था। जो मार्च 1993 में मुंबई में हुआ था और जो कुछ गुजरात में हुआ था, वह सब वहशीपन और पागलपन के अलावा कुछ नहीं था।

5 comments:

  1. क्या कीजियेगा, गुजरात के वोटर ही मुर्ख हैं.

    वैसे अपना बिहार यु.पी. भी बहुत बदनाम हैं. दंगे यहाँ भी बहुत हुए हैं. आज कल ब्लॉग जगत में भी दंगे भड़क रहे हैं. क्या कीजियेगा. ?

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  2. सवाल सिर्फ भगवान आने से हल नहीं हो सकता। गोधरा दंगा देश के दामन पर एक ऐसा दाग है जो कभी धुल नहीं सकता। मोदी भगवान को याद करके क्या साबित करना चाहते हैं, इसे समझना कठिन नहीं है। असल बात ये है कि जो भी गुजरात दंगे का दोषी है उसे जल्द से जल्द सजा मिलनी चाहिए। मोदी यदि ये कहते हैं कि वे आठ सालों से मीडिया के कटघरे में खड़े हैं तो हम तो यही कहना चाहेंगे कि यदि मीडिया को सजा देने का अधिकार रहता तो अब तक गोधरा दंगे के दोषियों को सजा मिल चुकी रहती।

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  3. पता नहीं कब मोदी को फाँसी होगी. मगर धैर्य रखें खूदा के घर देर है अंधेर नहीं. सबकी सच्चाई सामने आएगी. दूष्ट मोदी की भी, सेक्युलरों की भी और मानवाधिकार वालों की भी.

    मोदी साम्प्रयायिक है, उस पर ज्यादा उर्जा मत खर्च करो. मार दिया जाएगा युं ही किसी दंगे में. अब देखिये हाल में तीन दंगे हुए, तीनो मोदी ने करवाये ताकी हिन्दु अपना त्योंहार न मना सके. मोदी को छोड़ना मत. रोजी रोटी का सवाल है. वरना दंगो का क्या है, भागलपूर में भी हुए थे, दिल्ली में भी और मुम्बई तो भूल ही गया.

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  4. राकेश नाथApril 2, 2010 at 6:44 AM

    पहले गोयबल्स एक झूठ को बार बार बोल कर सच साबित करने की कोशिश करता था
    आजकल के गोयबल्स एक झूठ को अनेकों ब्लाग पर डालकर सच साबित करने की कोशिश करते हैं

    गुजरात बदनाम नहीं है, बदनाम तो तीस्ता जावेद सीतलवाड जैसी छाती कूटने वाली महिलायें और सेकूलरिया छाप लोग हैं जिन्होने झूठे हलफनामे दाखिल कराये. खुद सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एसआईटी ने अपने आपको आप जैसे लोगों की पोलपट्टी खोल दी है लेकिन फिर भी बेशर्म लोग अभी तक उचक रहे हैं.

    मोदी कोई हुसैन जैसे भगोड़े नहीं है जो कानून के आगे पेश होने के नाम पर मूत्र विसर्जन करने के लिये कतर भाग जाय, न वह बुखारी सरीखे हैं जो एन दिल्ली में बैठे रहें और कांग्रेसी बदनाम सरकारें गैर ज़मानती वारंट तामील न करा पायें.

    कैसे आदमी हो जो आदमी कानून का सम्मान करता है उसकी बुराई करते हो,
    और भगोड़ों के आगे नतमस्तक होते हो,

    यदि या तीस्ता जावेद सीतलवाड़ों की तरह ज़मीर नीलाम न कर दिया हो तो अल्लाह को याद करने की कोशिश करना

    हो सके तो नेट से बरेली के आंसू वीडियो खोज कर देखना

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  5. begani aaj tumne apna chir-parichit raag nahi alaapa??kya baat hui...are wahi ki jo 59 log train me jalaye gaye the wala??kya baat hui...sare progressive blogs par to yaho sawaal puchte the na tum?chalo tumhe tumhara jawaab mil gaya.

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